Saturday, February 7, 2015

विदेश नीति की नसीहत या हमारे आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप

विदेश नीति की नसीहत या हमारे आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप
अमेरिका ने भारत को एक बार फिर नसीहत दी है. अमेरिका का मानना है कि यह भारत की जिम्मेवारी बनती है कि वह अपने पडोसियों के साथ संबंध सुधारने के लिए आगे बढ़कर कदम उठाए.  भारत और पाकिस्तान दोनों के साथ मजबूत संबंधों का हवाला देते हुए अमेरिका के विदेश विभाग की उप प्रवक्ता मैरी हार्फ के अनुसार भारत को अपने पडोसी देशों के साथ अच्छे संबंध रखने चाहिए और उन संबंधों को सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए. उल्लेखनीय है कि इससे पहले ओबामा ने भारत को धार्मिक सहिष्णुता पाठ भी पढ़ाया था, जिसके बाद राजनीति गरमा गयी थी.
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अमरीकी राष्ट्रपति को बराक कहकर अपना करीबी बताने की कोशिश करते रहे पर आश्चर्य है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति को यह तक नहीं समझा पाए कि भारत एक सहिष्णु देश है, जहां सभी की भावनाओं का सम्मान होता है. वह ओबामा को यह भी नहीं समझा पाए कि भारत की  पड़ोसियों से सम्बन्ध सुधारने की लगातार कोशिशों के बावजूद पाक की नापाक हरकतें बंद नहीं हो रही हैं.
आशंका गहरी हो जाती है, जब ऐसा बयान उस बराक ओबामा की ओर से आता है जो अपने भारत-यात्रा पर आने के पहले पाक को आतंकी घटनाओं पर चेतावनी दे चुके थे. यानि अबतक की हमारी विदेश नीति की सारी कवायद विफल साबित हुई. साथ ही अमेरिका पाक के पक्ष में हमें विदेशनीति का दिशा-निर्देश देने की कोशिश कर हमारे आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहा है. मोदीजी को यह समझना होगा कि अमेरिका में मौसम बदलने के पहले ही वह अपना दोस्त बदल लेता है. उसकी सारी दोस्ती-दुश्मनी उसके व्यापारिक हित साधने के लिए होती है.

आवश्यकता है एक प्रभावी विदेश नीति की.. भारत के 125 करोड़ उपभोक्ताओं की ताकत समझने की, जो किसी भी व्यापारिक दलालों को अपने पक्ष में झुका सकती है.

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