Friday, February 6, 2015

समर शेष है, जन गंगा को खुलकर लहराने दो

आज दिल्ली विधानसभा के लिए मतदान का दिन है. भारतीय लोकतंत्र को नयी ऊर्जा देने का दिन है. ठहरी दिल्ली को विराम से मुक्त कर गतिमान करने का दिन है. आज सामूहिक प्रयास से जड़ हो गयी दिल्ली को चेतना प्रदान करने का दिन है. लोक-कुम्भ में समवेत सहभाग के इस पवित्र दिन पर डुबकी लगाने से इस बार कोई छूटने पाए. 4 दिसंबर 2013 को लगभग 34% लोग किन्हीं कारणों से बूथ तक नहीं पहुंच पाए थे. उन्हें निश्चित ही पिछली भूल का पछतावा हुआ होगा कि काश वे अपने व्यस्त क्षणों में से थोड़ा समय निकाल पाते तो शायद दिल्ली आज इस प्रकार ठहरी-सी नहीं रहती
आज का दिन हमारे स्वाभिमान के प्रगटीकरण का दिन है, आतंकवाद, महंगाई, असुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा में बाधाओं, और इस प्रकार की तमाम समस्याओं पर हमारी सकारात्मक क्रियाशील प्रतिक्रिया  का दिन है. निश्चय ही, अगर आज आलस्य, उदासीनता, निराशावादिता या किन्हीं निजी व्यस्तताओं  के कारण हम अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते तो फिर हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम नेताओं और राजनीतिक दलों पर उंगली उठाएं. अगर हमारी दिल्ली में अथवा राजनीति  में कोई गंदगी है तो उसकी सफाई के लिए हमें सतर्क रहना होगा. आज हमारी उसी सतर्कता की परीक्षा की घड़ी है.
ध्यान रहे, मतदान का अधिकार हमारी स्वतन्त्रता का प्रतीक ही नहीं है, बल्कि यह हमारे राष्ट्रनिर्माताओं के द्वारा लोकतंत्र की रक्षा के लिए सौपा गया सशक्त और सक्षम हथियार है. अतः आएं, तटस्थता त्यागें, सम्प्रदायजाति, भाषा, प्रांत की दीवारों को तोड़कर अपनी दिल्ली, अपने देश तथा अपने लोकतंत्र की रक्षा को आज शत-प्रतिशत मतदान का डंका पीट दें. यदि कोई भी चुनाव चिन्ह आपको आकर्षित नहीं कर पा रहा है तो आपके पास 'नोटा' का विकल्प खुला है.
उदासीनता मत ओढ़ें- ध्यान रहे 
जो तटस्थ हैं,  समय लिखेगा उनका भी अपराध


No comments:

Post a Comment