तीन दिनों तक ओबामा भारत में रहे और भारतीय गणतंत्र आत्ममुग्ध-सा बौराया हुआ नाचता रहा. भाजपा, 'यमला पगला दीवाना' के 'जो-पाजी' की तरह, जो 'एन आर आई' दामाद के नाम पर चुनाव जीतने के मंसूबे पाल रहा था, गदगदायी -सी दिख रही है. फिल्मों में जब 'एन आर आई' दामाद चुनाव जितवा सकता है तो ओबामा तो ओबामा ही हैं. लाखों 'एन आर आइयों' के एकमात्र आश्रय, लिमोजिन ‘बीस्ट’ और 'एयरफोर्स वन' वाले ओबामा….... दिल्ली चुनावों में भाजपा की आशा की एकमात्र 'किरण' बेदी ने मंगलवार को चुनावी दौरे के दौरान उगल ही दिया कि 'आज ओबामा आए हैं और पूरे देश में उत्साह है. मोदी ने इतना कुछ किया है. ओबामा इससे पहले इस तरह भारत नहीं आए'.…गोया ओबामा का भारत आना भाजपा के तथाकथित विकास की सबसे बड़ी उपलब्धि रही. अब सुना है कि बेदी भी 'मन की बात' कहेंगी। क्या कहेंगी हम सबको पता है..... प्रधानमन्त्रीजी के संसदीय क्षेत्र की टोन में कहें तो 'ई बात-उ बात, पंडाईन तनी सुरती दा' यानि, 'दे दो बाबा, ओबामा के नाम पर वोट दे दो'.
गत तीन दिनों तक ओबामामय गणतंत्र-गणतंत्र खेल रहा भारत का अभिभूत श्रेष्ठिवर्ग कुछ दृश्यों को शायद देख न पाया हो. एक ओर 'संप्रभुता संपन्न' भारत के सामरिक ताकत के प्रदर्शन पर लेडी ओबामा की भाव भंगिमा कुछ वैसी ही दिख रही थी जैसे रोबोट से खेलने वाला बच्चा चाभी से चलने वाले खिलौने देख रहा हो तो दूसरी ओर भीख की आशा में, कतार में खड़े भिखारियों की तरह भारत के 'धनकुबेरों' की याचना करती मुद्रा स्वावलम्बी(?) भारत की स्थिति का बयान कर रही थी..... आत्ममुग्ध-सा विश्व का तथाकथित सबसे बड़ा लोकतंत्र इसी बात पर विभोर हो रहा था कि पाकिस्तान और चीन हमसे जल रहे हैं. अरे, पाकिस्तान और चीन तो देख ही नहीं पाये कि 67 वें गणतंत्र पर भी अमेरिका से हम यह पूछने का साहस नहीं कर सके कि 'जब परमाणु चलित बिजली घर इतने ही कारगर और उपयोगी हैं तो आपने पिछले 24 वर्षों से नया रिएक्टर लगाया क्यों नहीं. भोपाल की गैस त्रासदी के हीरो एंडरसन को आपने बचा लिया, पर कहीं चेर्नोबिल वाली या जापान में सुनामी वाली भीषण घटना हुई तो 'युवा भारतीय न सिर्फ देश की तरक्की की इबारत लिखेंगे, बल्कि दुनिया की तकदीर भी तय करेंगे' वाली आपकी बात देखने के लिए यहां ज़िंदा कौन बचेगा.'
क्या बिडम्बना है कि जब समर्थ अमेरिका, जर्मनी समेत पूरा पश्चिम अनियंत्रित नाभिकीय ऊर्जा का मोह त्याग कोई नया विकल्प तलाश रहा है तो अमेरिका के नाभिकीय धनपशुओं के लिए हम चारागाह बनाये जा रहे है.
125 करोड़ की आबादी वाला विश्व का सबसे युवा गणतंत्र अपने 67 वें शौर्य-प्रदर्शन दिवस पर इतना असहाय दिखेगा, क्या हमें इसकी कल्पना थी?
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