अब बस भी कीजिए अन्ना...
कबतक सुनेंगे और देखेंगे.. किनके लिए लड़ेंगे... हम बेशर्म हैं अन्ना... जब हम गोलगप्पे के पानी में मूत्र मिलाकर बेचने में नहीं शर्माते, दूध में सिंथेटिक मिलाकर उसे बेचने में हमारे हाथ नहीं कांपते, स्कूली बच्चों को खानें में जहर देने से नहीं हिचकते, किडनी बेचकर परिवार पालते हैं, बेटियों को गर्भ में ही मार देते हैं, बिना कंकड़ मिलाए दाल-चावल नहीं बेचते, फलों-सब्जियों में बिना इंजेक्शन दिए मन कांपता है तो आप ही बताएं अन्ना! कि हम अपना प्रतिनिधि देवलोक से तो नहीं लाएंगे न?
जरा सोचिए और बुरा मत मानिएगा अन्ना---- यदि नवाब ने उन्हे छोड़कर किसी दूसरी खूबसूरत बला के साथ अय्याशी करनी शुरू कर दी होती तो उनका शर्म गायब हो जाता। पर आज जब बेटा ब्याहता दुल्हन और बेटे को छोड़कर अय्याशी कर रहा है तो इसे नवाबों का मिजाज समझकर मस्त होने वाली शर्मीला जी भी आपको ब्लैकमेलर कह रही हैं... तो क्या बुरा कर रही हैं... प्रजातंत्र है सबलोग यहां कुछ ज्यादा ही स्वतंत्र हैं।
अन्ना! साइमन कमीशन और रॉलैट एक्ट गोरे अंग्रेजों का था। विरोध चल निकला था... जमाना आज काले अंग्रेजों का है। लोग आचार्य रामदेव को राजनीति की बात नहीं करने देंगे पर नाचने गाने वाले, शर्म लाज बेचकर आपको ब्लैकमेलर कहें तो लोग तालियां ही बजाएंगे... समझ रहे हैं न अन्ना...
अब बस कीजिए.. बस भी कीजिए....
as we expected......keep alarming
ReplyDeleteबहुत अच्छा व्यंग्य है... जरुरत है कुछ और ऐसे लेखों की ताकि सरकार और दूसरे भ्रष्टतंत्र की सच्चाई देश के सामने आये।
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